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Saturday, July 11, 2026

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत प्रमुख या सदस्य का त्याग-पत्र/ अविश्वास प्रस्ताव/हटाया जाना

 उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत प्रमुख या सदस्य का त्याग-पत्र



प्रमुख या सदस्य का त्याग-पत्र (धारा-11)

ब्लॉक प्रमुख या क्षेत्र पंचायत का कोई निर्वाचित सदस्य स्वहस्ताक्षरित पत्र द्वारा पद त्याग सकता है। ब्लॉक प्रमुख सम्बंधित जिला पंचायत के अध्यक्ष को और अन्य (सदस्य) क्षेत्र पंचायत के प्रमुख को त्याग पत्र देते हैं। प्रमुख का त्याग-पत्र उस दिनांक से प्रभावी होगा, जब अध्यक्ष द्वारा त्याग पत्र की स्वीकृति क्षेत्र पंचायत के कार्यालय में प्राप्त हो जाए। सदस्य द्वारा दिया गया त्याग-पत्र उस दिनांक से प्रभावी होगा, जब क्षेत्र पंचायत के कार्यालय में उसकी नोटिस प्राप्त हो जाए। इस प्रकार यह समझा जाएगा कि ऐसे प्रमुख या सदस्य ने अपना पद रिक्त कर दिया है।      

प्रमुख का अविश्वास प्रस्ताव / हटाया जाना (धारा-15, 16)

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-15(1) में यह कहा गया है कि प्रमुख में अविश्वास का प्रस्ताव धारा 15(2) और 15 (3) में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है तथा उस पर कार्यवाही की जा सकती है।

1. धारा 15(2) के तहत प्रस्ताव करने का अभिप्राय का निर्धारित प्रारूप पर लिखित नोटिस क्षेत्र पंचायत के तत्कालीन निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के कम से कम आधे सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा। 

2. प्रस्तावक सदस्यों में से किसी एक के द्वारा व्यक्तिगत रूप से अविश्वास प्रस्ताव की प्रति कलेक्टर को दी जाएगी।

3. उसके बाद कलेक्टर क्षेत्र पंचायत की एक बैठक क्षेत्र पंचायत कार्यालय में अपने द्वारा निर्धारित तिथि पर बुलायेंगें और यह तिथि उपधारा 15 (2) के अधीन उसे नोटिस दिए जाने की दिनांक से तीस दिन के बाद की नहीं होगी।

4. कलेक्टर द्वारा क्षेत्र पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को ऐसी बैठक के लिए कम से कम 15 दिन का नोटिस निर्धारित रीति से दिया जाएगा।

5. ऐसी बैठक की अध्यक्षता उस परगनाधिकारी (एस.डी.एम.) करेगा, परन्तु प्रतिबन्ध यह है कि यदि क्षेत्र पंचायत एक से अधिक परगनों में क्षेत्राधिकार का प्रयोग करती हो अथवा परगनाधिकारी किसी कारणवश अध्यक्षता न कर सकें, तो कलेक्टर द्वारा नाम निर्दिष्ट कोई वैतनिक अपर या सहायक कलेक्टर उक्त बैठक की अध्यक्षता करेंगें। 

6. इस धारा के अधीन बुलाई गई बैठक के प्रारम्भ होते ही पीठासीन अधिकारी क्षेत्र पंचायत को वह प्रस्ताव पढ़कर सुनाएंगें, जिस पर विचार करने के लिए बैठक बुलाई गई हो तथा वह यह घोषित करेंगें कि उस पर वाद-विवाद किया जा सकता है।

7. इस धारा के अधीन किसी प्रस्ताव पर वाद विवाद स्थगित न होगा।

8. यदि ऐसा वाद-विवाद बैठक प्रारम्भ होने के लिए निश्चित समय से दो घन्टे बीतने के पहले ही समाप्त न हो जाए, तो वह दो घन्टे बीतते ही स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। वाद-विवाद की समाप्ति पर अथवा दो घन्टे की समाप्ति पर जो भी पहले हो, वह प्रस्ताव गुप्त मतदान के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। 

9. पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव के गुण-दोषों पर नहीं बोलेंगें और न वह उस पर मत देने के अधिकारी होंगें।

10. पीठासीन अधिकारी बैठक के तुरन्त बाद कार्यवाही की एक प्रति और उस पर हुए मतदान का परिणाम राज्य सरकार को तथा क्षेत्राधिकार युक्त जिला पंचायत को देंगें।

11. यदि प्रस्ताव क्षेत्र पंचायत को तत्कालीन सदस्यों की कुल संख्या के कम से कम आधे से अधिक समर्थन से पारित हो; तो 

(क) पीठासीन अधिकारी उक्त राय का प्रकाशन क्षेत्र पंचायत कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकवाकर करेंगें तथा गजट में उसे विज्ञापित भी कराएंगें।

(ख) नोटिस बोर्ड पर बैठक के निर्णय को चस्पा करने के अगले दिन ही प्रमुख अपना पद छोड़ देंगें।

12. यदि प्रस्ताव पारित न हुआ हो अथवा यदि गणपूर्ति न होने के कारण बैठक न जो सकी हो, तो जब तक कि उक्त बैठक की दिनांक से एक वर्ष व्यतीत न हो जाए, तब तक उसी प्रमुख में अविश्वास व्यक्त करने वाले किसी अनुवर्ती प्रस्ताव को नोटिस ग्रहण नहीं किया जाएगा।

13. इस धारा के अधीन किसी प्रस्ताव का नोटिस प्रमुख के पद ग्रहण करने के एक वर्ष के भीतर ग्रहण नहीं किया जाएगा। 

प्रमुख का हटाया जाना (धारा-16)

1. इन्हें निम्न आधारों पर अधिनियम की धारा-16 के अंतर्गत अपने पद से हटाया भी जा सकता है।

2. यदि राज्य सरकार की राय में प्रमुख अपने कर्तव्यों तथा कृत्यों का पालन जान-बूझ कर नहीं करते या अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हैं अथवा अपने कर्तव्यों के पालन में उन्हें अनाचार का दोषी पाया गया है या मानसिक या शारीरिक रूप से अपने कर्तव्यों के पालन में असमर्थ हो गए हों, तो राज्य सरकार, यथास्थिति उन्हें स्पष्टीकरण का समुचित अवसर देगी। इस मामले में अध्यक्ष का परामर्श मांगने और उसकी राय ऐसे परामर्श मांगने के पत्र के भेजे जाने की दिनांक से 30 दिन के भीतर प्राप्त हो जाए, तो इस राय पर विचारोपरांत, ऐसे प्रमुख को आदेश द्वारा राज्य सरकार  पद से हटा सकती है- ऐसा आदेश अंतिम होगा और उस पर किसी विधि न्यायालय में आपत्ति न की जा सकेगी। इस प्रक्रिया में प्रतिबिम्ब यह रखा गया है कि यदि नियत प्राधिकारी द्वारा प्रथम दृष्टया यह पाया जाए कि किसी प्रमुख ने वित्तीय और अन्य अनियमितताएं की है, तो ऐसा प्रमुख, अंतिम जाँच में आरोपों से मुक्त होने तक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग और संपादन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में इस निमित्त क्षेत्र पंचायत के तीन निर्वाचित सदस्यों की समिति उक्त कार्य करेगी।

3. इस धारा के अधीन पद से हटाया गया प्रमुख अपने पद से हटाये जाने की दिनांक से तीन वर्ष की अवधि तक प्रमुख के रूप में पुनः निर्वाचन का पात्र न होगा।                 

   

स्त्रोत- क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रशिक्षण हेतु सन्दर्भ साहित्य 

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