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Wednesday, April 8, 2026

लेख :- प्रकृति का संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है

प्रकृति का संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है

हम प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ,

दोषारोपण का कार्य दूसरों पर छोड़ दें।

                  गर्मी का मौसम आ रहा है, अब सभी को पेड़ों की याद आएगी, और मनुष्य पेड़ काट-काट कर ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी कर रहा है यह भी महसूस होने लगेगा । जब कड़ी धूप में घर से बाहर निकलेंगें तो पेड़ों की छाया और ठंडक की आवश्यकता महसूस होगी, कई बार मन में ख्याल भी आएगा कि “मनुष्य कितना स्वार्थी होता जा रहा है कि उसे पर्यावरण की तनिक भी चिंता नहीं है, न ही उसे पेड़ पौधे लगाने का कोई विचार आता है”। यदि हमारी भावनाएं और अधिक विकराल होंगी तो हम राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा अपने मन को तसल्ली दे देंगें । फिर मजबूत संकल्प के साथ विचार करेंगें कि यदि मैं किसी उच्च अथवा सत्ता पक्ष में नेतृत्व की भूमिका में होता तो आज चारों तरफ हरियाली ही हरियाली होती। यह सोच-सोच कर हमारा मन हर्ष उल्लास से भर जायेगा और हम अपने घर चलें जायेंगें। अगले दिन फिर हमें किसी कारण से धूप में निकलना पड़ा तो हम पुनः यही विचारों का एक मकड़जाल बना कर राहत की साँस लेंगें

                संभवतः यह पढ़कर आपको थोड़ा अजीब लगे परन्तु शहरी क्षेत्रों में अधिकाशं व्यक्तियों का जीवन गर्मियों के मौसम में इतनी चिंता तक ही सीमित रहता है, जिनका चिंतन थोड़ा अधिक हो जाता है वह आस-पास की किसी नर्सरी से छोटे से गमले में एक-दो पौधे ले आते हैं और अपने घरों की छत अथवा बालकनी में रख देते हैं । यदि आप बाकि लोगों से थोड़ा अधिक सजग और जागरूक हैं तो आस-पास के पार्क में पौधे लगाने और उसका संरक्षण करने का प्रयास करते हैं। इनसे भी जो अधिक सजग हैं वो सामूहिक रूप से पौधे लगाने का कार्यक्रम करते हैं और जन-जागरूकता अभियान जैसे आयोजन का प्रयास करते हैं। ठीक है कुछ नहीं से कुछ तो भला।

              यदि आपका मन भी प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है और आपको पेड़-पौधे, जलीय जीवन की चिंता होती है तो अभी आपके मन में प्रकृति के प्रति संवेदना है। वास्तव में शहरी क्षेत्रों में मनुष्य का जीवन आर्थिक गतिविधियों के कुशल संचालन और परिवार के भरण पोषण में इतना उलझ कर रह गया है कि वह चाहते हुए भी बहुत से कार्य नहीं कर पा रहा है । घरों का क्षेत्रफल दिन पर दिन छोटा होता जा रहा है, जिन लोगों ने एकांकी जीवन का चयन करते हुए अथवा सुविधाओं को देखते हुए ऊँची इमारतों में अपना फ़्लैट ले लिया है उनके यहाँ छतों की जगह छोटी बालकनी ने ले ली है, ऐसे में बड़े गमलों और पौधे लगाने की सम्भावना लगभग न के बराबर हो जाती है, जो लोग किराये के मकान में हैं वह कभी मकान बदलना होगा तो क्या होगा? इसकी चिंता में अधिकांश कम और छोटे पौधों को ही महत्त्व देते हैं । जिनके पास स्वयं की छत भी है वह इस चिंता में उलझ जाते हैं कि पौधों का नियमित भरण पोषण कैसे होगा ? उसमें खाद कब और कैसे पड़ेगी? इनसे भी बड़ी चिन्ता यह है कि गमलों में गर्मियों के मौसम में सुबह और शाम दोनों समय पानी डालना पड़ता है, यदि दो दिन भी चूक हुई तो पौधा सूखने लगेगा ।

         जब से ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ा है तब से पड़ोस की राशन की दुकान पर न जाकर ऑनलाइन बिस्तर पर बैठे रोजमर्रा का सामान गेट पर ही मंगाया जाने लगा है । कुछ लोगों को चूल्हा जलाकर भोजन बनाने में भी आलस आने लगा है सक्षम लोग ऑनलाइन ही भोजन ऑर्डर करने लगे हैं। ऐसे आलस भरे जीवन में पौधों का पालन-पोषण करना कुछ आलसी लोगों के लिए तो कठिन ही प्रतीत होता है।

            वास्तव में आप प्रकृति के लिए कुछ करना चाहते हैं या एक सकारात्मक परिवर्तन होता देखना चाहते हैं, तो शुरुआत हमें स्वयं से करनी पड़ेगी । इसके लिए हमें कोई बहुत बड़ा युद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। बस हमें दैनिक दिनचर्या में बहुत छोटे-छोटे परिवर्तन करने पड़ेंगें, जब यही परिवर्तन सामूहिक रूप से होने लगते हैं तो बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है। यदि हम छोटा सा उदाहरण पॉलीथीन का ले, तो हम देखते हैं कि शाम को जब हम बाजार सब्जी लेने जाते हैं और आलू, प्याज, टमाटर, गोभी, खीरा, धनिया, मिर्च, नींबू सिर्फ इतना ही लेते हैं, तो कम से कम 4 पॉलीथीन हो जाती हैं और उन 4 पॉलीथीन को रखने के लिए एक बड़ी पॉलीथीन, जिनका उपयोग सिर्फ इतना ही है कि वह सिर्फ सब्जी को दुकान से घर लाकर फ्रिज अथवा टोकरी में सब्जी को डालने तक ही प्रयोग होती है। उसके बाद या तो कूड़ेदान में फेंक दी जाती है अथवा किसी बड़ी पॉलीथीन में, भविष्य में कभी आवश्यकता पड़ेगी यह सोचकर एकत्र की जाती है। एक दिन में 5 पॉलीथीन और यदि हम महीने में 10 दिन ही सब्जी लायें, तो लगभग 50 पॉलीथीन एक महीने में । यदि हम 140 करोड़ की जनसँख्या वाले देश में 14 सदस्यों का एक बड़ा परिवार मानकर भी तुलना करें तो 10 करोड़ परिवार अर्थात् एक महीने में 500 करोड़ पॉलीथीन, साल भर में 6,000 करोंड़ पॉलीथीन । इसी प्रकार राशन लेने जाते हैं तो घर में पॉलीथीन का भंडार लग जाता है। 

            इसका एक छोटा सा विकल्प है कि यदि कभी हम सब्जी लेने जाएँ तो अपने साथ कपड़े का थैला ले जाएँ । यदि किसी दिन थैला ले जाना भूल गए तो अगली बार जब सब्जी लें तो उसे पॉलीथीन वापस कर दें । इससे उसके भी कुछ पैसे बच जायेंगें और सार्वजानिक रूप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।                                                          

              ऐसे में कई बुद्धिजीवी सलाह देते हैं कि सरकार को सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद कर देना चाहिए, पैक्ड चिप्स, कुरकुरे, नमकीन की पॉलीथीन रिसाइकल हो जाती है। ऐसे में क्या आपको लगता है कि आपके द्वारा प्रयोग की गई सभी प्रकार की पॉलीथीन रिसाइकल प्लांट तक पहुँच जाती है? नहीं । वह इधर-उधर घूमती रहती है। पॉलीथीन आर्थिक और बाजार की गतिविधियों का एक बड़ा भाग बन गई है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इसके प्रयोग को ख़त्म नहीं किया जा सकता। “हाँ” इसके प्रयोग को कम किया जा सकता हैं। हमें अपने स्तर से अधिकतम जितना प्रयास हो सकें करना चाहिए। यही छोटे-छोटे प्रयास एक दिन बड़े परिवर्तन का कारण बनते हैं।

                इसी प्रकार ए.सी. और फ़िल्टर से निकलने वाले पानी को व्यर्थ ही नाली में न बहाकर उसे हम पौधों अथवा वॉशरूम में प्रयोग कर सकते हैं। प्रयोग न होने पर बिजली के बल्ब और पंखें को बंद कर सकते हैं। हम अपने जीवन में यह प्रण ले सकते हैं कि सीढ़ी चढ़ने के लिए न सही, पर उतरने के लिए हम लिफ्ट का प्रयोग नहीं करेंगें। हमें 500 मीटर या एक किलोमीटर की दूरी तक का कोई कार्य है तो बेवजह वाहन का प्रयोग नहीं करेंगें, इससे न सिर्फ आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, पैसे की बचत होगी और पर्यावरण भी अच्छा होगा।    

               इसी प्रकार के छोटे-छोटे परिवर्तन समाज और प्रकृति में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं, परन्तु शर्त यह है कि शुरुआत हम से हो ।

-प्रशान्त मिश्र

(लेखक सामाजिक चिन्तक और विचारक हैं)

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश 


 

Sunday, February 22, 2026

उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की निर्वाचक नामावली का पुनरीक्षण

उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
 की निर्वाचक नामावली का पुनरीक्षण  

      राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश के द्वारा जारी अधिसूचना (संशोधन) दिनांक 19/02/2026, पत्र संख्या 354/ रा.नि.आ.-3/पं.नि/26-25/2026 में उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की निर्वाचन नामावली के वृहद पुनरीक्षण हेतु आदेश जारी किये गए हैं: 

1. दावे/आपत्तियों के निस्तारण के उपरान्त हस्तलिखित पांडुलिपियों तैयार करना, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय में जमा करना एवं संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन/निस्तारण की कार्यवाही करने की अवधि 07 जनवरी 2026 से 16 मार्च 2026 निर्धारित की गई है

2. दावे और आपत्तियों के निस्तारण के उपरान्त पूरक सूचियों की कम्प्यूटरीकरण की तैयारी तथा उन्हें मूल सूची में यथा स्थान समाहित करने एवं यथावश्यक मतदान केन्द्रों/स्थलों के निर्धारण की कार्यवाही हेतु 21 फरवरी 2026 से 16 मार्च 2026 तक की तिथि निर्धारित की गई है

3. मतदाता सूचियों की कम्प्यूटरीकरण के उपरान्त मतदान केन्द्रों/स्थलों का नामांकन, मतदेय स्थलों के वार्डों की मैपिंग, मतदाता क्रमांकन, SVN आवंटन, मतदाता सूची की डाउनलोडिंग फोटो प्रतियाँ कराने आदि कार्यों के लिए 17 मार्च 2026 से 13 अप्रैल 2026 तक की तिथि निर्धारित की गई है

4. निर्वाचक नामावलियों का जनसामान्य के लिए अंतिम प्रकाशन के लिए 15 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की गई है

 

Saturday, February 14, 2026

प्रदेश की ग्राम पंचायतों के ISO Certification कराए जाने के सम्बन्ध में

    
ग्राम पंचायतों का ISO Certification   
 सितम्बर 2023 को जारी पत्र संख्या 33-3099/186/2023 जिसका विषय प्रदेश की ग्राम पंचायतों के ISO Certification करना था. इस पत्र के  प्रेषक मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन है, इस पत्र के माध्यम से ग्राम पंचायत के ISO Certification हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये गए  





नोट:- इस पटल पर प्रकाशित किसी भी प्रकार की जानकारी के प्रमाणित होने की जिम्मेदारी प्रकाशक की नहीं है.. 

पंचायत सहायक द्वारा ग्राम सचिवालय/पंचायत भवन नियमित रूप से खोले जाने के सम्बन्ध में

पंचायत सचिवालय का नियमित संचालन 
दिनांक 28 जून 2023 को फ़ाइल संख्या 33-3002(099)/22/2002 को पंचायत सचिवालय को नियमित रूप से खोले जाने के सम्बन्ध में एक शासनादेश जारी किया गया जिसके प्रेषक मनोज कुमार सिंह अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन थे तथा विषय :- पंचायत सहायक/ एकाउंटेंट-कम-डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा ग्राम सचिवालय/पंचायत भवन नियमित रूप से खोले जाने के सम्बन्ध में, इस पत्र के माध्यम से पंचायत सचिवालय के नियमित रूप से खोलने एवं संचालित करने के लिए की जिम्मेदारी पंचायत सहायक को प्रदान की गई है: 

   


 नोट:- इस पटल पर प्रकाशित किसी भी प्रकार की जानकारी के प्रमाणित होने की जिम्मेदारी प्रकाशक की नहीं है.. 

Wednesday, November 12, 2025

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव-2026 निर्वाचन हेतु पत्रों का मूल्य, निक्षेप (जमानत) धनराशि तथा उम्मीदवारों हेतु अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित


उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव-2026 

निर्वाचन हेतु पत्रों का मूल्य, निक्षेप (जमानत) धनराशि तथा उम्मीदवारों हेतु अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित 


    राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा 31 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र संख्या 1021/रा.नि.आ.-3/पं.नि./58-24/2025 के माध्यम से समस्त जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी, (पंचायत एवं नगरीय निकाय) निर्देश जारी किया गया । जिसका विषय त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन 2026 एवं उप निर्वाचनों हेतु पत्रों का मूल्य, निक्षेप (जमानत) की धनराशि तथा उम्मीदवारों हेतु अधिकतम व्यय सीमा का निर्धारण किये जाने के सम्बन्ध में है। 

पदवार निर्वाचन हेतु पत्रों का मूल्य, निक्षेप (जमानत) धनराशि तथा उम्मीदवारों हेतु अधिकतम व्यय सीमा का विवरण निम्नलिखित है : -

* सदस्य ग्राम पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 200  रुपये निर्धारित किया गया है। जमानत की धनराशि 800 रुपये तथा अधिकतम व्यय सीमा 10,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* प्रधान ग्राम पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 600 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 3000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 1,25,000 रुपये निर्धारित की गई है। 

* सदस्य क्षेत्र पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 600 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 3,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 1,00,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* सदस्य जिला पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 1,000 रुपये निर्धारित किया गया है। जमानत की धनराशि 8,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 2,50,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* प्रमुख क्षेत्र पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 2,000 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 10,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 3,50,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* अध्यक्ष जिला पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 3000 रुपये निर्धारित किया गया है। जमानत की धनराशि 25,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 7,25,000 रुपये निर्धारित की गई है। 

        वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए छूट के भी कुछ प्रावधान भी किये गए हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है :- 

 * अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, सदस्य ग्राम पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 100  रुपये निर्धारित किया गया है। जमानत की धनराशि 400 रुपये तथा अधिकतम व्यय सीमा 10,000 रुपये ही निर्धारित की गई है ।

* अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, प्रधान ग्राम पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 300 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 1500 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 1,25,000 रुपये निर्धारित की गई है। 

* अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, सदस्य क्षेत्र पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 300 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 1,500 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 1,00,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, सदस्य जिला पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 500 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 4,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 2,50,000 रुपये निर्धारित की गई है।

* अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, प्रमुख क्षेत्र पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 1,000 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 5,000 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 3,50,000 रुपये ही निर्धारित की गई है। 

* अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला, अध्यक्ष जिला पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 1,500 रुपये निर्धारित किया गया है । जमानत की धनराशि 12,500 रुपये अधिकतम व्यय सीमा 7,00,000 रुपये ही निर्धारित की गई है। 



Tuesday, October 7, 2025

GPDP (2026-27) ग्राम पंचायत विकास योजना, उत्तर प्रदेश Gram Panchayat Development Plan, Uttar Pradesh

 ग्राम पंचायत विकास योजना - GPDP 

वित्तीय वर्ष :- 2026-27

सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजना के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं, विभिन्न सहयोगी विभागों के द्वारा जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा जन योजना अभियान की अवधि में आयोजित विशेष ग्राम सभा की बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं की सूचना उपलब्ध कराया जाना सितम्बर, 2025  माह के तीसरे सप्ताह मे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं वहीं
 
* वार्षिक कार्ययोजना तैयार किये जाने हेतु ग्राम सभा की कम से कम 02 बैठकों (प्रथम बैठक जागरूकता एवं कार्ययोजना पर विचार तथा द्वितीय बैठक कार्ययोजना कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाना) का अनिवार्य रूप से आयोजन के सम्बन्ध में भी निर्देश दिए गए हैं
* महिला सभा एवं बाल सभा के आयोजन, ग्राम सभा के आयोजन से पूर्व अनिवार्य रूप से किया जाए, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला व बाल विकास, महिला कल्याण तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी आदि की उपस्थिति हो

उक्त के साथ ही इस बार के पत्र में दिनांक 27 मई 2022 के पत्र को संलग्न किया गया है जिसका विषय Localization of SDGs (सतत् विकास के लक्ष्य के स्थानीयकरण) के क्रियान्वयन हेतु समस्त विभागों के स्तर से आवश्यक कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में था /  इस पत्र में सम्बंधित विभागों की भूमिका निर्धारित की गई थी। विस्तृत विवरण एवं पत्र की प्रति नीचे दी गई है:-    

संख्या:- आर.जी.एस.ए /58/2025, प्रेषक, निदेशक, पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश।

विषय:- 02 अक्टूबर, 2025 से 31 मार्च, 2026 के मध्य 2026-27 की सहभागी पंचायत विकास योजना/वार्षिक कार्य योजना तैयार किए जाने हेतु जन योजना अभियान (पी.पी.सी. कैम्पेन) के संचालन के सम्बन्ध में।

पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के अर्धशासकीय पत्र संख्या:- एम-11011/15/2025-सी.बी., दिनांक 17 सितम्बर, 2025 (छायाप्रति संलग्न) का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें. जिसके माध्यम से वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु जन योजना अभियान का संचालन किए जाने एवं पत्र दिनांक 22 सितम्बर 2025 (छायाप्रति संलग्न) के द्वारा जनजाति कार्यमंत्रालय के द्वारा संचालित आदि कर्मयोगी अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन किये जाने के निर्देश जारी किये गए हैं..  




























































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