उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और उसके सदस्यों का कार्यकाल
क्षेत्र पंचायत और उसके सदस्यों का कार्यकाल (धारा-8)
* प्रत्येक क्षेत्र पंचायत, यदि इस अधिनियम के अधीन उसे पहले से हो विघटित नहीं कर दिया जाता है तो अपने प्रथम बैठक के लिए नियत दिनांक से पांच वर्ष के अधीन तक, न कि उससे अधिक बनी रहेगी।
* किसी क्षेत्र पंचायत के किसी सदस्य का कार्यकाल, यदि इस अधिनयम के उपबंधों के अधीन अन्यथा समाप्त न कर दिया जाये तो क्षेत्र पंचायत के कार्यकाल के अवसान तक होगा।
कुछ मामलों में अस्थाई व्यवस्था (धारा-9 क)
जब प्रमुख अनुपस्थिति, बीमारी अथवा अन्य किसी कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो, तब जिस दिनांक तक प्रमुख अपना पदभार फिर से न ग्रहण कर ले, उस दिनांक तक जिला मजिस्ट्रेट आदेश द्वारा प्रमुख के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए विवेकानुसार व्यवस्था कर सकता है।
आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति (धारा-12)
यदि किसी प्रमुख या क्षेत्र पंचायत के किसी निर्वाचित सदस्य का स्थान, मृत्यु या अन्य किसी कारण के रिक्त हो जाए, तो उस स्थान की पूर्ति होने की दिनांक से छ: मास की अवधि की सम्पति के पूर्व, पूर्वाधिकारी के शेष कार्यकाल के लिए की जाएगी। यहाँ यह प्रतिबन्ध भी रहेगा कि यदि पद रिक्त होने की दिनांक, क्षेत्र पंचायत के शेष कार्यकाल 6 मास से कम हो, तो रिक्त की पूर्ति नहीं की जाएगी।
सदस्यता या अनर्हता के सम्बन्ध में विवाद (धारा-14)
* यदि यह विवाद उठे कि कोई ग्राम प्रधान क्षेत्र पंचायत का सदस्य है कि नहीं तो यह विवाद राज्य सरकार को नियत रीति से भेजा जाएगा और उस पर राज्य सरकार का निर्णय अंतिम तथा बाध्यकारी होगा।
*यदि इस विषय पर विवाद है कि कोई व्यक्ति क्षेत्र पंचायत का सदस्य विविध: चुना गया अथवा नहीं या वह सदस्य होने के लिए पात्र है कि नहीं तो प्रश्न न्यायाधीश को नियत रीति से भेजा जाएगा एवं उस पर न्यायाधीश का निर्णय अंतिम तथा बाध्यकारी होगा।
*यदि न्यायाधीश यह निर्णय करे कि सदस्य विधित: नहीं चुना गया था या वह क्षेत्र पंचायत का सदस्य रहने का पात्र नहीं रह गया है तो वह तो वह सदस्य उस निर्णय की दिनांक से क्षेत्र पंचायत का सदस्य नहीं रहेगा।
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